जब बीरबल बीमार पड़ा

एक बार बीरबल बीमार पड़ गया और कई दिन तक दरबार में नहीं जा सका । बादशाह अकबर भी बीरबल को लेकर चिंतित थे और उससे मिलना चाहते थे । एक दिन बादशाह जा ही पहुँचे बीरबल के घर । बादशाह को देखकर बीरबल भी ख़ुश हो गया । बीमारी के कारण वह बेहद कमजोर हो गया था । बादशाह यह जानने को बेताब थे कि इस बीमारी ने कहीं बीरबल के दिमाग़ पर असर तो नहीं किया । इधर बीरबल जलपान आदि की व्यवस्था के लिए जैसे ही अंदर गया कि बादशाह ने उससे पलंग के चारों पायों तले एक – एक काग़ज़ दबा दिया ।

जब बीरबल लौटा और बिस्तर पर लेटा और उसे ऐसा लगा कि ज़रूर कुछ न कुछ बदला हुआ सा है । पर क्या…? यह जानने के लिए उसने कमरे में चारों और नजरे घूमाई इस बीच बादशाह अकबर ने जान बूझकर बीरबल को बातों में उलझाए रखा । लेकिन बीरबल का तो ध्यान न जाने कहा था । आख़िरकार अकबर ने बीरबल से उसकी बेचैनी का कारण पूछा ही लिया । बीरबल बोला, “ हुज़ूर ! न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा पलंग वैसा नहीं है, जैसा मैं छोड़ कर गया था । कुछ ज़रूर बदला-बदला सा लग रहा है ।”कैसा बदलाव ? अकबर ने पूछा । “ हुजूर ! मुझे कुछ ऐसा लग रहा है कि पलंग के पाए किसी काग़ज़ में धंस गए है या फिर पलंग कुछ ऊँचा उठा सा लग रहा है । अब बादशाह की समझ में आ गया कि बीमारी ने बीरबल के दिमाग़ पर कोई असर नहीं डाला है । लेकिन फिर भी ऐसा जताते हुए की वे कुछ नहीं जानते अकबर बोले, “ बीमारी में ऐसे शक अक्सर उठ खड़े होते है । “ हुजूर ! मेरा शरीर ज़रूर बीमार है , लेकिन दिमाग़ अब भी पहले जैसा ही है । “ तब मुस्कुराते हुए अकबर ने बीरबल को असलियत बता दी।

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